Judicial Samvad | प्रयागराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मकान मालिक-किरायेदार विवादों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किरायेदारी विवाद (Rent Proceedings) में कोई तीसरा व्यक्ति केवल इस आधार पर पक्षकार (Impleadment) नहीं बन सकता कि वह संपत्ति पर अपना मालिकाना हक (Ownership/Title) होने का दावा करता है।
कोर्ट ने कहा कि U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 के तहत चलने वाली बेदखली की कार्यवाही केवल मकान मालिक और किरायेदार के बीच के विवाद के निस्तारण के लिए होती है। इन कार्यवाहियों में संपत्ति के स्वामित्व (Title) से जुड़े जटिल विवादों का निर्णय नहीं किया जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
मामले में मकान मालिक ने Section 21(2), U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 के तहत किरायेदार के खिलाफ बेदखली (Eviction) का मामला दायर किया था।
सुनवाई के दौरान एक तीसरे व्यक्ति ने Order I Rule 10 CPC के तहत आवेदन देकर स्वयं को मुकदमे में पक्षकार बनाने की मांग की।
उसका दावा था कि संबंधित संपत्ति पर वास्तविक मालिकाना हक उसी का है और इसलिए उसे भी मुकदमे में सुना जाना चाहिए।
रेंट अथॉरिटी और रेंट ट्रिब्यूनल का फैसला
पहले Rent Authority ने तीसरे व्यक्ति का आवेदन स्वीकार कर उसे पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी।
लेकिन बाद में Rent Tribunal ने इस आदेश को पलटते हुए कहा कि—
- यह मुकदमा केवल मकान मालिक और किरायेदार के अधिकारों से संबंधित है।
- तीसरे व्यक्ति का मालिकाना हक का दावा इस कार्यवाही के दायरे से बाहर है।
- इसलिए उसे पक्षकार नहीं बनाया जा सकता।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने रेंट ट्रिब्यूनल के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि—
Section 21 के तहत चलने वाली कार्यवाही का उद्देश्य केवल यह तय करना है कि—
- मकान मालिक और किरायेदार के बीच कानूनी संबंध (Landlord-Tenant Relationship) है या नहीं।
- बेदखली के लिए कानून में निर्धारित आधार मौजूद हैं या नहीं।
इन कार्यवाहियों में स्वामित्व (Ownership) या टाइटल (Title) जैसे जटिल प्रश्नों पर फैसला नहीं किया जा सकता।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा—
जो व्यक्ति मकान मालिक के विरुद्ध स्वतंत्र मालिकाना हक (Independent Title) का दावा करता है, वह केवल उस दावे के आधार पर किरायेदारी विवाद में पक्षकार बनने का अधिकार नहीं रखता।
यदि ऐसे दावों को Rent Authority में सुनने की अनुमति दी जाए, तो किरायेदारी विवाद अनावश्यक रूप से जटिल हो जाएंगे और कानून द्वारा निर्धारित त्वरित (Summary) प्रक्रिया का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
यदि तीसरा व्यक्ति मालिकाना हक का दावा करता है तो क्या करे?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—
यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि संपत्ति वास्तव में उसकी है, तो उसके लिए उचित मंच सिविल कोर्ट (Civil Court) है।
वह वहां स्वतंत्र दीवानी वाद (Civil Suit) दायर कर अपने अधिकारों का निर्णय करा सकता है।
लेकिन Rent Authority के समक्ष चल रही बेदखली कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
Article 227 पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि—
Article 227 के तहत उसका अधिकार केवल यह देखने तक सीमित है कि अधीनस्थ न्यायालय या ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर कार्य किया है या नहीं।
जब तक आदेश—
- अधिकार क्षेत्र से बाहर,
- स्पष्ट रूप से अवैध,
- मनमाना,
- या न्याय में गंभीर विफलता उत्पन्न करने वाला न हो,
तब तक हाई कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा।
कोर्ट का अंतिम फैसला
हाई कोर्ट ने कहा कि—
- रेंट ट्रिब्यूनल का आदेश पूरी तरह कानून के अनुरूप है।
- तीसरे व्यक्ति का मालिकाना हक का दावा Rent Proceedings में नहीं सुना जा सकता।
- उसके लिए अलग से सिविल कोर्ट का रास्ता उपलब्ध है।
इसलिए याचिका खारिज कर दी गई।
इस फैसले का कानूनी महत्व
✅ Rent Authority केवल मकान मालिक और किरायेदार के विवाद का निर्णय करेगी।
✅ स्वामित्व (Title) और मालिकाना हक के विवाद Civil Court में तय होंगे।
✅ तीसरा व्यक्ति केवल मालिकाना दावा करके Eviction Case में पक्षकार नहीं बन सकता।
✅ Order I Rule 10 CPC का उपयोग करके Rent Proceedings का दायरा नहीं बढ़ाया जा सकता।
✅ U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 का उद्देश्य किरायेदारी विवादों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण है।
Case Details
Court: High Court of Judicature at Allahabad
Judge: Hon'ble Dr. Justice Yogendra Kumar Srivastava
Case Title: Murti Markandeshwar Ji Maharaj Gopal Ki Bagiya City Jhansi vs. Smt. Jyoti Gangwani & Another
Case No.: Matters Under Article 227 No. 7436 of 2026
Judgment Date: 15 July 2026
Relevant Provisions:
- Article 227, Constitution of India
- Section 21(2), U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021
- Order I Rule 10, Code of Civil Procedure, 1908
Final Decision: याचिका खारिज। हाई कोर्ट ने माना कि तीसरा व्यक्ति स्वतंत्र मालिकाना हक का दावा करते हुए Rent Proceedings में पक्षकार नहीं बन सकता।
Discussion Question
क्या आपको लगता है कि यदि कोई व्यक्ति संपत्ति पर अपना मालिकाना हक होने का दावा करता है, तो उसे किरायेदारी विवाद में पक्षकार बनने की अनुमति मिलनी चाहिए, या उसे अलग से सिविल कोर्ट में ही अपना दावा करना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।
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