JUDICIAL SAMVAD (नई दिल्ली): देश की सर्वोच्च अदालत ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ होने वाली विभागीय जांच (Disciplinary Proceedings) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनी सिद्धांत स्पष्ट कर दिया है
अक्सर प्रशासनिक और सेवा मामलों (Service Matters) में कानूनी शब्दावली की व्याख्या को लेकर बड़े विवाद खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने आया: क्या अनुशासनात्मक नियमों में इस्तेमाल होने वाले शब्द "May" (सकता है) को "Shall" (होगा/अनिवार्य) माना जा सकता है?
यह मामला कैनरा बैंक और उसकी एक दिवंगत वरिष्ठ प्रबंधक (Senior Manager) के कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच का है
क्या था मुख्य कानूनी विवाद?
इस मामले में मुख्य रूप से दो कानूनी सवाल विचारणीय थे
क्या हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने विभागीय जांच के निष्कर्षों को पलटकर अपने 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया
? क्या कैनरा बैंक अधिकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियमावली, 1976 के रेगुलेशन 10 में प्रयुक्त "May" शब्द अनिवार्य (Mandatory) है या निर्देशात्मक (Directory)
? यह रेगुलेशन एक ही मामले में कई कर्मचारियों के खिलाफ संयुक्त कार्यवाही (Common Proceedings) से संबंधित है .
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
दिवंगत कर्मचारी प्रेम लता उप्पल कैनरा बैंक की नई दिल्ली शाखा में सीनियर मैनेजर (Scale-III) के पद पर कार्यरत थीं और क्रेडिट सेंक्शन कमेटी की सदस्य थीं
आरोप थे कि उन्होंने
बिना किसी जमीनी जांच या क्रेडिट वेरिफिकेशन के लोन पास किया
. गिरवी रखी जाने वाली संपत्तियों के मालिकाना हक की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की
. बड़े पैमाने पर नकद निकासी की अनुमति दी और फंड के उपयोग की निगरानी नहीं की
.
बैंक ने जांच के बाद उन्हें डिमोशन (Reversion to a lower grade) की सजा दी
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और कानूनी सिद्धांत
1. 'May' का मतलब 'Must' या 'Shall' नहीं होता:
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक अंग्रेजी भाषा अपना मूल अर्थ नहीं खो देती, तब तक "May" को "Must" नहीं समझा जा सकता
2. रेगुलेशन 10 निर्देशात्मक (Directory) है, अनिवार्य (Mandatory) नहीं:
अदालत ने फैसला सुनाया कि रेगुलेशन 10 में "May" शब्द का प्रयोग पूरी तरह से निर्देशात्मक (Directory) है
3. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का दायरा:
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सबूतों के अभाव और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) के उल्लंघन के आधार पर सजा को रद्द किया था
केस डिटेल्स (Case Details)
केस का नाम: कैनरा बैंक बनाम प्रेम लता उप्पल (मृतक) कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से
साइटेशन (Citation): [2026] 6 S.C.R. 283 : 2026 INSC 478
अपील संख्या: सिविल अपील संख्या 7460 / 2026
फैसले की तारीख: 12 मई 2026
पीठ (Bench): माननीय न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और माननीय न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई
संबद्ध कानून/नियम: कैनरा बैंक अधिकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियमावली, 1976 का रेगुलेशन 10
पाठकों के लिए सवाल (पाठक अपनी राय दें)
क्या आपको लगता है कि अगर एक ही घोटाले या मामले में बैंक के कई अधिकारी शामिल हों, तो उनके खिलाफ अलग-अलग जांच करने के बजाय अनिवार्य रूप से एक ही संयुक्त जांच (Common Proceeding) होनी चाहिए ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी कानूनी राय जरूर साझा करें।