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Friday, July 17, 2026

क्या 2021 के बाद मकान मालिक-किरायेदार के विवाद Small Causes Court में चल सकते हैं? इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

 

Judicial Samvad | प्रयागराज

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मकान मालिक और किरायेदार (Landlord-Tenant) विवादों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई किरायेदारी विवाद उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 (U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021) लागू होने के बाद दायर किया गया है, तो उसकी सुनवाई सामान्यतः Small Causes Court (SCC Court) में नहीं बल्कि 2021 के अधिनियम के तहत गठित Rent Authority के समक्ष होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर कि मकान मालिक ने पहले Transfer of Property Act की धारा 106 के तहत नोटिस भेज दिया था, Small Causes Court का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) सुरक्षित नहीं रह जाता।




क्या था पूरा मामला?

हापुड़ स्थित दो दुकानों के संबंध में मकान मालिक ने किरायेदार को 15 जुलाई 2021 को धारा 106, Transfer of Property Act, 1882 के तहत किरायेदारी समाप्त करने का नोटिस भेजा।

इसके बाद 20 अगस्त 2021 को मकान मालिक ने किरायेदार के खिलाफ Small Causes Court, हापुड़ में बेदखली (Eviction), किराया बकाया और हर्जाना वसूलने का मुकदमा दायर किया।

मुकदमे के दौरान किरायेदार की मृत्यु हो गई और उसके कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Representatives) को पक्षकार बनाया गया।

उत्तराधिकारियों ने अदालत में आपत्ति उठाई कि—

  • जब मुकदमा दायर हुआ, तब तक U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 लागू हो चुका था।
  • इसलिए इस विवाद की सुनवाई Small Causes Court नहीं बल्कि Rent Authority के समक्ष होनी चाहिए थी।

निचली अदालत ने क्या कहा?

Small Causes Court ने यह कहते हुए आपत्ति खारिज कर दी कि—

  • किरायेदारी पहले ही धारा 106 TPA के नोटिस से समाप्त हो चुकी थी।
  • इसलिए मुकदमा Small Causes Court में ही चल सकता है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के इस दृष्टिकोण को कानूनी रूप से गलत बताया।

कोर्ट ने कहा कि—

किसी अदालत का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) यह देखकर तय होगा कि मुकदमा किस तारीख को दायर किया गया, न कि यह देखकर कि नोटिस कब भेजा गया था।

यदि मुकदमा 2021 के अधिनियम के लागू होने के बाद दायर हुआ है, और वह अधिनियम उस विवाद पर लागू होता है, तो मामला Rent Authority के समक्ष ही जाएगा।


धारा 106 TPA पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि—

Transfer of Property Act की धारा 106 केवल किरायेदारी समाप्त करने का कारण (Cause of Action) देती है।

लेकिन यह तय नहीं करती कि मुकदमे की सुनवाई किस अदालत में होगी।

यानी—

✔️ नोटिस देना एक अलग बात है।

✔️ मुकदमा किस अदालत में चलेगा, यह उस समय लागू कानून से तय होगा जब मुकदमा दायर किया गया।


Section 38, 2021 Act का क्या महत्व है?

हाई कोर्ट ने कहा कि Section 38(1) स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था करता है कि—

जहां 2021 का अधिनियम लागू होता है, वहां उससे संबंधित विवादों की सुनवाई विशेष रूप से Rent Authority करेगी।

ऐसी स्थिति में सामान्य दीवानी अदालतों तथा Small Causes Court का अधिकार क्षेत्र समाप्त हो जाता है।


कोर्ट ने क्यों पलटा निचली अदालत का फैसला?

हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने—

  • Jurisdiction और Cause of Action में अंतर नहीं समझा।
  • केवल धारा 106 TPA के नोटिस को आधार बनाकर मुकदमे को SCC Court में चलने योग्य मान लिया।
  • जबकि 2021 के नए कानून के लागू होने के बाद मंच (Forum) बदल चुका था।

इसलिए निचली अदालत का आदेश कानून के विपरीत था।


क्या मकान मालिक का दावा खत्म हो गया?

नहीं।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—

मकान मालिक का अधिकार समाप्त नहीं हुआ है।

उन्हें स्वतंत्रता दी गई है कि वे U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 के तहत सक्षम Rent Authority के समक्ष नया वाद दायर कर सकते हैं।


हाई कोर्ट का अंतिम फैसला

✔️ दोनों Revision स्वीकार कर ली गईं।

✔️ Small Causes Court, हापुड़ के आदेश रद्द कर दिए गए।

✔️ घोषित किया गया कि SCC Suit No. 3 of 2021 Small Causes Court में विचारणीय (Maintainable) नहीं है।

✔️ मकान मालिक को Rent Authority के समक्ष नया मामला दायर करने की स्वतंत्रता दी गई।


इस फैसले का कानूनी महत्व

✅ 2021 के बाद दायर किरायेदारी विवादों में अधिकार क्षेत्र नए Tenancy Act से तय होगा।

✅ धारा 106 TPA का नोटिस केवल Cause of Action देता है, Jurisdiction तय नहीं करता।

✅ Section 38, U.P. Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021 Rent Authority को विशेष अधिकार देता है।

✅ गलत मंच (Wrong Forum) में दायर मुकदमा आगे नहीं चल सकता।


Case Details

Court: High Court of Judicature at Allahabad

Judge: Hon'ble Dr. Justice Yogendra Kumar Srivastava

Case Titles:

  • Manoharlal (Deceased) & Others vs. Jagdish Prasad Goel (S.C.C. Revision No. 79 of 2025)
  • Manoharlal (Deceased) & Others vs. Jagdish Prasad Goel (S.C.C. Revision No. 51 of 2026)

Judgment Date: 15 July 2026

Relevant Laws:

  • Uttar Pradesh Regulation of Urban Premises Tenancy Act, 2021
  • Section 38, U.P. Tenancy Act, 2021
  • Section 106, Transfer of Property Act, 1882
  • Order VII Rule 11, Code of Civil Procedure

Final Decision: दोनों SCC Revisions स्वीकार। Small Causes Court का अधिकार क्षेत्र समाप्त माना गया तथा मकान मालिक को Rent Authority के समक्ष उचित कार्यवाही करने की स्वतंत्रता दी गई।




Discussion Question

क्या आपको लगता है कि नए किरायेदारी कानून लागू होने के बाद सभी मकान मालिक-किरायेदार विवाद केवल Rent Authority के समक्ष ही सुने जाने चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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