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Saturday, June 13, 2026

क्या कोर्ट ट्रायल के दौरान अपनी मर्जी से प्रक्रिया तय कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

 नई दिल्ली : हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रक्रिया (Criminal Justice Procedure) के संबंध में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी उच्च न्यायालय अपनी शक्तियों का उपयोग करके आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) द्वारा निर्धारित ट्रायल की प्रक्रिया को बदल नहीं सकता और न ही ट्रायल का कोई नया चरण (new stage) बना सकता है।




क्या था मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश से उपजा था, जिसमें अदालत ने निर्देश दिया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत ट्रायल के दौरान, चार्ज फ्रेम करने से पहले ही 'सेंक्शनिंग अथॉरिटी' (Sanctioning Authority) से पूछताछ की जानी चाहिए

उच्च न्यायालय का तर्क था कि इससे समय की बचत होगी और अगर मंजूरी (Sanction) गलत तरीके से दी गई है, तो ट्रायल शुरू होने से पहले ही मामले को खत्म किया जा सकता है

सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के इस निर्देश को खारिज कर दिया और निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • प्रक्रिया का पालन: कोर्ट ने कहा कि CrPC में ट्रायल की एक निश्चित प्रक्रिया (अध्याय XV से XXI) दी गई है जनरल प्रोविजन्स (जैसे धारा 311 CrPC) का उपयोग करके ट्रायल की प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता

  • न्यायिक कानून (Judicial Fiat): सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अदालतें न्यायिक आदेश के माध्यम से ट्रायल का कोई नया चरण (stage) पैदा नहीं कर सकतीं

  • अधिकार क्षेत्र: अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए, उच्च न्यायालय CrPC को 'फिर से नहीं लिख' सकता और न ही निचली अदालतों को कानून से हटकर नई प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दे सकता है

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश के पैरा 32 और 33 में दिए गए उन सभी दिशा-निर्देशों को रद्द कर दिया, जिनमें निचली अदालतों को चार्ज फ्रेम करने से पहले सेंक्शनिंग अथॉरिटी को बुलाने के लिए कहा गया था । यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून की स्थापित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

केस विवरण (Case Details)

विवरणजानकारी
केस शीर्षक

द स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम रवि शंकर सिंह व अन्य

कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)

केस संख्या

क्रिमिनल अपील संख्या 2191-2192/2025

निर्णय तिथि

10 जून, 2026

न्यायाधीश

प्रशांत कुमार मिश्रा और अतुल एस. चंदुरकर



क्या आप इस मामले के कानूनी पहलुओं या धारा 311 CrPC के दायरे के बारे में और अधिक गहराई से समझना चाहते हैं?

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