Judicial Samvad | प्रयागराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में ट्रांसफर याचिकाओं (Transfer Application) पर एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल पत्नी की सुविधा, बच्चे की पढ़ाई या किसी दूसरे शहर में लंबित भरण-पोषण (Maintenance) का मामला, अपने आप में वैवाहिक मुकदमे को दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित (Transfer) करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि Section 24 CPC के तहत ट्रांसफर का अधिकार एक विवेकाधीन (Discretionary) शक्ति है, जिसका प्रयोग केवल तभी किया जाएगा जब वास्तव में न्याय प्रभावित होने, गंभीर कठिनाई (Genuine Hardship) या असाधारण परिस्थितियां (Exceptional Circumstances) साबित हों।
क्या था पूरा मामला?
पत्नी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 (Restitution of Conjugal Rights) के तहत अलीगढ़ फैमिली कोर्ट में लंबित मुकदमे को गौतम बुद्ध नगर फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित किया जाए।
पत्नी का कहना था कि—
- वह वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर में अपनी नाबालिग बेटी के साथ रह रही हैं।
- बेटी वहीं पढ़ाई कर रही है।
- बार-बार अलीगढ़ आना आर्थिक और शारीरिक रूप से कठिन है।
- गौतम बुद्ध नगर में पहले से ही भरण-पोषण (Maintenance) का मुकदमा लंबित है, इसलिए दोनों मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होनी चाहिए।
पति ने क्या तर्क दिया?
पति की ओर से कहा गया कि—
- पत्नी का मायका और ननिहाल दोनों अलीगढ़ में हैं।
- केवल बेटी की पढ़ाई के कारण मुकदमा ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
- पत्नी ट्रांसफर याचिका के माध्यम से केवल मुकदमे में देरी करना चाहती हैं।
- Section 9 HMA का उद्देश्य परिवार को पुनः साथ लाना है, लेकिन ट्रांसफर याचिका के कारण मूल मुकदमे की सुनवाई ही रुकी हुई है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायालय ने कहा कि—
- Section 24 CPC का उद्देश्य किसी पक्ष को उसकी पसंद का मंच (Forum) उपलब्ध कराना नहीं बल्कि न्याय सुनिश्चित करना है।
- केवल यात्रा की असुविधा या दूसरे शहर में रहना पर्याप्त कारण नहीं है।
- पत्नी को यह साबित करना होगा कि यदि मुकदमा वर्तमान अदालत में चलता रहा तो उसे वास्तविक और गंभीर कठिनाई होगी तथा न्याय मिलने से वह वंचित हो जाएगी।
- केवल Maintenance Case का दूसरे शहर में लंबित होना भी ट्रांसफर का स्वतः आधार नहीं बनता।
- अदालत को दोनों पक्षों की सुविधा, मुकदमे की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य, मुकदमे की स्थिति तथा न्याय के हित को समग्र रूप से देखना होगा।
कोर्ट की महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि—
ट्रांसफर याचिका का उपयोग Forum Shopping के लिए नहीं किया जा सकता।
यदि केवल सुविधा के आधार पर मुकदमे स्थानांतरित किए जाने लगे, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसलिए प्रत्येक मामले में वास्तविक कठिनाई और न्याय के हित को प्रमाण सहित सिद्ध करना आवश्यक है।
कोर्ट का अंतिम निर्णय
हाई कोर्ट ने पाया कि पत्नी यह साबित नहीं कर सकीं कि अलीगढ़ में मुकदमे की सुनवाई से उन्हें इतनी गंभीर कठिनाई होगी जिससे न्याय प्रभावित हो।
इसलिए—
- ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी गई।
- अंतरिम आदेश (Interim Order) समाप्त कर दिया गया।
- फैमिली कोर्ट, अलीगढ़ को मूल वैवाहिक मुकदमे की सुनवाई शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया गया।
इस फैसले का कानूनी महत्व
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि—
- पत्नी की सुविधा एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन एकमात्र आधार नहीं।
- बच्चे की पढ़ाई या दूसरे शहर में लंबित भरण-पोषण का मामला स्वतः ट्रांसफर का अधिकार नहीं देता।
- Section 24 CPC के अंतर्गत ट्रांसफर तभी होगा जब वास्तविक कठिनाई और न्याय प्रभावित होने का ठोस प्रमाण हो।
- अदालतें प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाएंगी।
Case Details
Court: High Court of Judicature at Allahabad
Judge: Hon'ble Dr. Justice Yogendra Kumar Srivastava
Case Title: Smt. Priyanka Maheshwari vs. Vaibhav Maheshwari
Case No.: Transfer Application (Civil) No. 376 of 2025
Decision Date: 30 July 2026
Relevant Provisions:
- Section 24, Code of Civil Procedure, 1908
- Section 9, Hindu Marriage Act, 1955
- Section 144, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
Result: Transfer Application Dismissed.
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