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Friday, July 24, 2026

क्या एक ही गोद लेने (Adoption Deed) को लेकर अलग-अलग अदालतों में दो मुकदमे चल सकते हैं? इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

 

Judicial Samvad | प्रयागराज

यदि एक ही गोद लेने के दस्तावेज़ (Adoption Deed) को लेकर दो अलग-अलग अदालतों में मुकदमे लंबित हों, तो क्या दोनों मामलों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में जारी रहनी चाहिए?

इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब दो मुकदमे एक ही दस्तावेज़, समान पक्षकारों और लगभग समान कानूनी विवाद से जुड़े हों, तो न्याय के हित में दोनों मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होना अधिक उचित है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से विरोधाभासी फैसलों (Conflicting Judgments) की संभावना समाप्त होती है, न्यायिक समय की बचत होती है और विवाद का प्रभावी एवं समग्र समाधान संभव होता है।




क्या था पूरा मामला?

मामले में 30 जून 2022 को एक पंजीकृत गोद लेने का दस्तावेज़ (Registered Adoption Deed) निष्पादित किया गया, जिसके तहत एक नाबालिग बच्ची को आवेदकों ने विधिवत गोद लिया।

आवेदकों का कहना था कि गोद लेने के बाद से बच्ची उनके परिवार में रह रही है और वे उसकी देखभाल कर रहे हैं।

बाद में जैविक पक्ष (Respondents) ने बच्ची को वापस लेने का दबाव बनाना शुरू किया।

इसी कारण आवेदकों ने कानपुर नगर की अदालत में एक दीवानी वाद दायर किया, जिसमें अदालत से यह घोषणा (Declaration) मांगी गई कि गोद लेने का दस्तावेज़ पूरी तरह वैध और बाध्यकारी (Valid and Binding) है।

इसके बाद प्रतिवादियों ने कन्नौज की अदालत में उसी Adoption Deed को रद्द (Cancellation) कराने के लिए अलग मुकदमा दायर कर दिया।


हाई कोर्ट के सामने क्या सवाल था?

मुख्य प्रश्न यह था कि—

क्या एक ही Adoption Deed को लेकर दो अलग-अलग अदालतों में समान विवाद वाले मुकदमे चलते रहने चाहिए, या फिर दोनों मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होनी चाहिए?


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा कि—

  • दोनों मुकदमे एक ही Adoption Deed से संबंधित हैं।
  • दोनों में पक्षकार भी लगभग समान हैं।
  • दोनों मामलों में साक्ष्य (Evidence) और कानूनी प्रश्न भी लगभग समान होंगे।
  • यदि दोनों अदालतें अलग-अलग निर्णय दें, तो विरोधाभासी (Conflicting) फैसले आने की संभावना रहेगी।

ऐसी स्थिति न्याय व्यवस्था के हित में नहीं मानी जा सकती।


Section 24 CPC पर कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि Section 24, Code of Civil Procedure के तहत हाई कोर्ट को मुकदमों के ट्रांसफर की शक्ति इसलिए दी गई है ताकि—

  • न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी हो,
  • समान विवादों पर अलग-अलग फैसले न आएं,
  • समय और संसाधनों की बचत हो,
  • तथा न्याय का समुचित प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर केवल पक्षकारों की सुविधा के लिए नहीं बल्कि न्याय के व्यापक हित (Ends of Justice) के लिए किया जाता है।


पहले दायर मुकदमे को क्यों दी गई प्राथमिकता?

हाई कोर्ट ने कहा कि सामान्यतः यदि—

  • दो मुकदमे समान विषय पर हों,
  • दोनों सक्षम अदालतों में लंबित हों,

तो जहां पहला मुकदमा पहले से लंबित है, वहीं बाद में दायर मुकदमे को स्थानांतरित करना न्यायसंगत होता है।

इस मामले में भी पहला मुकदमा कानपुर नगर में पहले से लंबित था, इसलिए बाद में दायर कन्नौज का मुकदमा वहीं ट्रांसफर करना उचित माना गया।


विपक्ष ने भी जताई सहमति

सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने भी अदालत में कहा कि यदि मुकदमा कन्नौज से कानपुर नगर ट्रांसफर किया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

हालांकि हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ पक्षकारों की सहमति के आधार पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

अदालत को स्वयं यह संतुष्ट होना आवश्यक है कि ट्रांसफर वास्तव में न्याय के हित में है।


हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ट्रांसफर आवेदन स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि—

  • कन्नौज की अदालत में लंबित O.S. No. 170 of 2023 को कानपुर नगर की सक्षम अदालत में ट्रांसफर किया जाए।
  • कन्नौज की अदालत 15 दिनों के भीतर पूरा रिकॉर्ड कानपुर नगर भेजे।
  • कानपुर नगर की अदालत आवश्यकतानुसार दोनों मुकदमों की संयुक्त सुनवाई (Joint Hearing) या कानून के अनुसार उपयुक्त प्रक्रिया अपनाने पर विचार करेगी ताकि विरोधाभासी निर्णयों से बचा जा सके।

इस फैसले का कानूनी महत्व

✅ समान दस्तावेज़ और समान विवाद वाले मुकदमों की सुनवाई एक ही अदालत में होना न्याय के हित में है।

✅ Section 24 CPC का उद्देश्य केवल सुविधा नहीं बल्कि Effective Administration of Justice है।

✅ अलग-अलग अदालतों से विरोधाभासी फैसले आने से बचाना भी ट्रांसफर का महत्वपूर्ण आधार है।

✅ पहले दायर मुकदमे वाली अदालत को सामान्यतः प्राथमिकता दी जाएगी।


Case Details

Court: High Court of Judicature at Allahabad

Judge: Hon'ble Dr. Justice Yogendra Kumar Srivastava

Case Title: Preeti Mishra & Another vs. Vishnu Kant Tripathi & Another

Case No.: Transfer Application (Civil) No. 900 of 2023

Judgment Date: 23 July 2026

Relevant Provision: Section 24, Code of Civil Procedure, 1908

Final Decision: Transfer Application Allowed. कन्नौज में लंबित वाद को कानपुर नगर की सक्षम अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश।




Discussion Question

क्या एक ही दस्तावेज़ और समान विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई हमेशा एक ही अदालत में होनी चाहिए ताकि विरोधाभासी फैसलों से बचा जा सके? अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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