Friday, June 19, 2026

अमेज़न (Amazon) को तगड़ा झटका: गलत कैमरा भेजकर रिफंड रोकने पर उपभोक्ता अदालत ने लगाया रुपये 4.68 लाख का कुल जुर्माना व 9% का ब्याज!

Darjeeling: ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान मंगाना कभी-कभी मानसिक प्रताड़ना का कारण बन जाता है। ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से सामने आया है, जहाँ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission, Darjeeling) ने उपभोक्ता सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के लिए ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon Seller Services Private Ltd और उसके रजिस्टर्ड सेलर Clicktech Retail Private Ltd पर कड़ा एक्शन लिया है।



अदालत ने पीड़ित ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विपक्षियों को कैमरे की पूरी कीमत लौटाने के साथ-साथ भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला? (The Background)
अमेज़न का तर्क: "हम सिर्फ एक मध्यस्थ (Intermediary) हैं"
उपभोक्ता अदालत का ऐतिहासिक फैसला (The Final Judgment)
अदालत ने निम्नलिखित राहत देने का आदेश जारी किया :

विवरण (Particulars)स्वीकृत राशि (Awarded Amount)
कैमरे की मूल कीमत (Product Cost)रुपये 1,43,000
मानसिक उत्पीड़न और प्रताड़ना के लिए मुआवजारुपये 2,000,000
सेवा में कमी और लापरवाही के लिए मुआवजारुपये 1,00,000
मुकदमेबाजी का खर्च (Litigation Cost)रुपये 25,000
कुल देय राशिरुपये 4,68,000 + 9% ब्याज
उपभोक्ताओं के लिए सीख (Key Takeaway for Consumers)
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दार्जिलिंग के रहने वाले श्री सोलोमन लेपचा (Soloman Lepcha) ने अमेज़न (www.amazon.in) के माध्यम से सेलर क्लिकटेक रिटेल प्राइवेट लिमिटेड से रुपये 1,43,000 की कीमत का एक प्रीमियम डिजिटल कैमरा "Fujifilm X-T5" ऑर्डर किया था।

  • गलत प्रोडक्ट की डिलीवरी: 10 फरवरी 2025 को जब उन्हें पार्सल मिला, तो उसमें वह कैमरा नहीं था जो उन्होंने ऑर्डर किया था। पार्सल के अंदर कम स्पेसिफिकेशन वाला Fujifilm X-T50 मॉडल भेजा गया था। पैकेट पर दो अलग-अलग टैग (एक पर X-T50 और दूसरे पर X-T5) लगे हुए थे, जो पैकेजिंग की गड़बड़ी को साफ बयां कर रहे थे।

  • रिफंड से इनकार और झूठा आरोप: ग्राहक के शिकायत करने पर अमेज़न ने सामान वापस (Return) ले लिया। सेलर को रिटर्न प्रोडक्ट 20 फरवरी 2025 को मिल भी गया। लेकिन अगले ही दिन अमेज़न ने रिफंड देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि ग्राहक ने 'गलत और इस्तेमाल किया हुआ सामान' वापस भेजा है। अमेज़न ने अपनी कथित "इंटरनल इन्वेस्टिगेशन" का हवाला देकर ग्राहक की बात सुनने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

लीगल नोटिस भेजने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो पीड़ित उपभोक्ता ने अधिवक्ता श्री सुनाम शर्मा, श्री पल्लव शर्मा और श्री सूरज मोहंता के माध्यम से उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मामले की सुनवाई के दौरान अमेज़न ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 79 के तहत खुद को सिर्फ एक 'इंटरmediary' (बिचौलिया) बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उन्होंने तर्क दिया कि वे वन-टाइम पासवर्ड (OTP) और टैम्पर-प्रूफ पैकेजिंग के जरिए सुरक्षित डिलीवरी करते हैं।

शिकायतकर्ता का करारा जवाब:

उपभोक्ता के वकीलों ने लिखित सबमिशन में अमेज़न के इस दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेज़न केवल एक बिचौलिया नहीं है, बल्कि वह लिस्टिंग को होस्ट करने, पेमेंट मैनेज करने, शिपिंग/रिटर्न लॉजिस्टिक्स को नियंत्रित करने और इनवॉइस जेनरेट करने तक, हर मुख्य प्रक्रिया को खुद संचालित और नियंत्रित करता है। इसलिए वह अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता।

माननीय अध्यक्ष श्री टिकेंद्र नारायण प्रधान और महिला सदस्य श्रीमती भावना थाकुरी की पीठ ने पाया कि नोटिस तामिल होने के बावजूद सेलर और अमेज़न कोर्ट के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखने या उपभोक्ता के साक्ष्यों को काटने में पूरी तरह विफल रहे। इसके चलते मामले की सुनवाई एकतरफा (Ex-parte) की गई।

अदालत ने माना कि उपभोक्ता के पास मौजूद फोटोग्राफिक सबूत और ईमेल पूरी तरह सच्चे हैं। अमेज़न और सेलर द्वारा वैध रिफंड रोकना और सामान भी अपने पास रख लेना 'Deficiency in Service' और 'Unfair Trade Practice' का स्पष्ट उदाहरण है।

उपभोक्ता अदालत ने विपक्षियों को आदेश की तारीख (18 जून 2026) से 45 दिनों के भीतर निम्नलिखित भुगतानों को पूरा करने का निर्देश दिया है:

नोट: अदालत ने स्पष्ट किया है कि उपरोक्त सभी राशियों पर केस दर्ज होने की तारीख से लेकर पूरी वसूली होने तक 9% वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा। यदि कंपनियां 45 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन नहीं करती हैं, तो शिकायतकर्ता कानून के तहत निष्पादन (Execution) प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्वतंत्र होगा।

यह फैसला यह साबित करता है कि ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स कितनी भी बड़ी क्यों न हों, वे ग्राहकों के अधिकारों का हनन नहीं कर सकतीं। यदि आपके साथ भी ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसा धोखा (Wrong Item Delivery) होता है, तो:

  1. डिलीवरी पैकेट और उसके साथ आए सभी टैग/लेबल के फोटोज और अनबॉक्सिंग वीडियो जरूर बनाएं।

  2. कंपनी के साथ हुए सभी ईमेल और चैट सपोर्ट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

  3. राहत न मिलने पर बिना डरे उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) की शरण लें।

कानूनी सजगता ही उपभोक्ता का सबसे बड़ा हथियार है!


केस टाइटल (Case Title): सोलोमन लेपचा बनाम अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य (Soloman Lepcha Vs. Amazon Seller Services Private Ltd & Ors.)

उपभोक्ता शिकायत संख्या (Consumer Complaint No.): 09/2025

फोरम (Court/Forum): जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल (District Consumer Disputes Redressal Commission, Darjeeling, West Bengal)

केस दर्ज होने की तिथि (Date of Filing): 23 जून 2025

फैसले की तिथि (Date of Disposal/Judgment): 18 जून 2026

पीठ (Hon'ble Bench): श्री टिकेंद्र नारायण प्रधान (माननीय अध्यक्ष) एवं श्रीमती भावना थाकुरी (माननीय सदस्य)


क्या आपके साथ भी कभी ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसा कोई फ्रॉड हुआ है? कमेंट सेक्शन में अपनी राय और अनुभव हमारे साथ साझा करें।

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